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mahabharat 12.29.28: आतिथ्य-प्रिय राजा सुहोत्र उन नदियों में सैकड़ों-हजारों स्वर्ण मछलियाँ, मगरमच्छ और कछुए डाले जाते देख कर आश्चर्यचकित हो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.28 
हिरण्यान् पातितान् दृष्ट्वा मत्स्यान् मकरकच्छपान्।
सहस्रशोऽथ शतशस्ततोऽस्मयदथोऽतिथि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आतिथ्य-प्रिय राजा सुहोत्र उन नदियों में सैकड़ों-हजारों स्वर्ण मछलियाँ, मगरमच्छ और कछुए डाले जाते देख कर आश्चर्यचकित हो गए।
 
'The hospitality-loving King Suhotra was astonished to see hundreds and thousands of golden fishes, crocodiles and tortoises being dropped into those rivers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)