श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.29.26 
सत्यनामा वसुमती यं प्राप्यासीज्जनाधिपम्।
हिरण्यमवहन् नद्यस्तस्मिञ्जनपदेश्वरे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘राजा सुहोत्र को पाकर पृथ्वी का नाम वसुमती सार्थक हो गया। जब वे इस क्षेत्र के शासक थे, तब वहाँ की नदियाँ अपने जल के साथ सोना बहाती थीं।॥26॥
 
‘The name of the earth Vasumati became meaningful after getting King Suhotra. When he was the ruler of the region, the rivers there used to flow gold along with their water.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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