Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.24: सृंजय! धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन - इन चारों बातों में राजा मरुत तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ २४॥
अनुवाद
सृंजय! धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन - इन चारों बातों में राजा मरुत तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो॥ 24॥
‘Srunjay! In all these four things – Dharma, knowledge, detachment and wealth – King Marut was superior to you and was more pious than your son. When they too have died, what about others? Therefore, do not grieve for your son.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥