Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.21: हे राजनश्रेष्ठ! जब राजा मरुत इस पृथ्वी पर राज्य करते थे, तब यह बिना जोते-बोए ही अन्न उपजा करती थी। सम्पूर्ण भूमण्डल पर मन्दिरों की माला दिखाई देती थी, जिससे यह पृथ्वी अत्यन्त सुन्दर हो जाती थी। ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजनश्रेष्ठ! जब राजा मरुत इस पृथ्वी पर राज्य करते थे, तब यह बिना जोते-बोए ही अन्न उपजा करती थी। सम्पूर्ण भूमण्डल पर मन्दिरों की माला दिखाई देती थी, जिससे यह पृथ्वी अत्यन्त सुन्दर हो जाती थी। ॥21॥
O best of kings! When King Marut ruled this earth, it used to yield food grains without ploughing or sowing. All across the globe a garland of temples used to be visible, which used to make this earth very beautiful. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥