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mahabharat 12.29.18-19: सृंजय ! हमने सुना है कि अविक्षित के पुत्र राजा मरुत्त भी मर गये थे, जिनके यज्ञ में बृहस्पति के साथ इन्द्र और वरुण सहित समस्त देवता और प्रजाजन आये थे ॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.18-19 
आविक्षितं मरुत्तं च मृतं सृञ्जय शुश्रुम॥ १८॥
यस्य सेन्द्रा: सवरुणा बृहस्पतिपुरोगमा:।
देवा विश्वसृजो राज्ञो यज्ञमीयुर्महात्मन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सृंजय ! हमने सुना है कि अविक्षित के पुत्र राजा मरुत्त भी मर गये थे, जिनके यज्ञ में बृहस्पति के साथ इन्द्र और वरुण सहित समस्त देवता और प्रजाजन आये थे ॥18-19॥
 
'Srinjay! We have heard that King Marutta, the son of Avikshit, also died, in whose sacrifice all the gods and people including Indra and Varuna had come with Brihaspati in front. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)