Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.29.149: नारदजी कहते हैं, "हे राजन! तुम्हारा जो सुवर्णष्ठीवि नामक पुत्र उत्पन्न हुआ था और जिसे पर्वत ऋषि ने तुम्हें दिया था, वह चला गया। अब मैं तुम्हें पुनः हिरण्यनाभ नामक पुत्र दे रहा हूँ, जो एक हजार वर्ष तक जीवित रहेगा।" 149.   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  12.29.149 
नारद उवाच
यस्ते पुत्रो गमितोऽयं विजात:
स्वर्णष्ठीवी यमदात् पर्वतस्ते।
पुनस्तु ते पुत्रमहं ददामि
हिरण्यनाभं वर्षसहस्रिणं च॥ १४९॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं, "हे राजन! तुम्हारा जो सुवर्णष्ठीवि नामक पुत्र उत्पन्न हुआ था और जिसे पर्वत ऋषि ने तुम्हें दिया था, वह चला गया। अब मैं तुम्हें पुनः हिरण्यनाभ नामक पुत्र दे रहा हूँ, जो एक हजार वर्ष तक जीवित रहेगा।" 149.
 
Narada says, "O King! The son named Suvarnashthivi who was born to you and whom the sage Parvat gave you, is gone. Now I am again giving you a son named Hiranyanabh, who will live for a thousand years." 149.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि षोडशराजोपाख्याने एकोनत्रिंशोऽध्याय:॥ २९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें सोलह राजाओंका उपाख्यानविषयक* उन्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९॥

* यह षोडश राजाओंका उपाख्यान द्रोणपर्वके पचपनवें अध्यायसे लेकर इकहत्तरवें अध्यायतक पहले आ चुका है। उसीको कुछ संक्षिप्त करके पुन: यहाँ लिया गया है। पहलेका परशुरामचरित्र इसमें संगृहीत नहीं हुआ है और पहले जो राजा पौरवका चरित्र आया था, उसके स्थानमें यहाँ अंगराज बृहद्रथके चरित्रका वर्णन है। कथाओंके क्रममें भी उलटा-पलटी हो गयी है। श्लोकोंके पाठोंमें भी कई जगह भेद दिखायी देता है।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)