Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.146: संजय बोले, "नारद! मैं आपके उन वचनों को सुन रहा हूँ जो पवित्र सुगन्धि की माला के समान विचित्र अर्थों से परिपूर्ण हैं। आपके वे वचन जो पुण्यात्मा, महामनस्वी और यशस्वी राजा के चरित्र से युक्त हैं, समस्त दुःखों का नाश करने में समर्थ हैं।" 146. | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय बोले, "नारद! मैं आपके उन वचनों को सुन रहा हूँ जो पवित्र सुगन्धि की माला के समान विचित्र अर्थों से परिपूर्ण हैं। आपके वे वचन जो पुण्यात्मा, महामनस्वी और यशस्वी राजा के चरित्र से युक्त हैं, समस्त दुःखों का नाश करने में समर्थ हैं।" 146.
Sanjaya said, "Narad! I am listening to your words which are full of strange meanings like a garland of sacred fragrance. Your words which are imbued with the character of a virtuous, great-minded and famous king are capable of destroying all sorrows." 146.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥