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mahabharat 12.29.142: जब भी वह समुद्र की ओर जाता, उसका जल शांत हो जाता। नदियों की बाढ़ शांत हो जाती। उसके रथ का ध्वज कभी नहीं टूटता।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.142 
आपस्तस्तम्भिरे चास्य समुद्रमभियास्यत:।
सरितश्चानुदीर्यन्त ध्वजभङ्गश्च नाभवत्॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
जब भी वह समुद्र की ओर जाता, उसका जल शांत हो जाता। नदियों की बाढ़ शांत हो जाती। उसके रथ का ध्वज कभी नहीं टूटता।
 
‘Whenever he travelled towards the sea, its waters would become still. The floods of the rivers would calm down. The flag of his chariot would never get broken.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)