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mahabharat 12.29.139: वेनन्दन पृथु को देखकर समस्त प्रजाजनों ने एक स्वर में कहा, "हम इनसे प्रेम करते हैं।" इस प्रकार प्रजा को प्रसन्न करने के कारण ये 'राजा' कहलाये।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.139 
पृथुं वैन्यं प्रजा दृष्ट्वा रक्ता: स्मेति यदब्रुवन्।
ततो राजेति नामास्य अनुरागादजायत॥ १३९॥
 
 
अनुवाद
वेनन्दन पृथु को देखकर समस्त प्रजाजनों ने एक स्वर में कहा, "हम इनसे प्रेम करते हैं।" इस प्रकार प्रजा को प्रसन्न करने के कारण ये 'राजा' कहलाये।
 
On seeing Venanandana Prithu, all the subjects said in unison, "We are in love with him." Thus, because of pleasing the subjects in this manner, he came to be known as 'Raja.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)