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mahabharat 12.29.138: ॠषियों ने यह सोचकर उसका नाम पृथु रखा कि यह समस्त लोकों में धर्म की मर्यादा स्थापित करेगा और सबको दुःख और अनिष्ट से बचाएगा, इसलिए यह क्षत्रिय कहलाया ॥138॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  12.29.138 
प्रथयिष्यति वै लोकान् पृथुरित्येव शब्दित:।
क्षताद् यो वै त्रायतीति स तस्मात् क्षत्रिय: स्मृत:॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
ॠषियों ने यह सोचकर उसका नाम पृथु रखा कि यह समस्त लोकों में धर्म की मर्यादा स्थापित करेगा और सबको दुःख और अनिष्ट से बचाएगा, इसलिए यह क्षत्रिय कहलाया ॥138॥
 
'The sages named him Prithu, thinking that he would establish the dignity of religion in all the worlds. He saved everyone from harm and sorrow, hence he was called Kshatriya. 138॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)