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mahabharat 12.29.137: सृंजय! हमने सुना है कि वेन के पुत्र महाराज पृथु को भी शरीर त्यागना पड़ा था। महर्षियों ने महान वन में एकत्रित होकर उन्हें राजा बनाया था। 137।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.137 
राजानं च पृथुं वैन्यं मृतं शुश्रुम सृंजय।
यमभ्यषिञ्चन् सम्भूय महारण्ये महर्षय:॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
सृंजय! हमने सुना है कि वेन के पुत्र महाराज पृथु को भी शरीर त्यागना पड़ा था। महर्षियों ने महान वन में एकत्रित होकर उन्हें राजा बनाया था। 137।
 
'Srunjay! We have heard that Ven's son Maharaja Prithu also had to give up his body. The great sages had gathered in the great forest and crowned him as the king. 137.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)