श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  12.29.135 
खानयामास य: कोपात् पृथिवीं सागराङ्किताम्।
यस्य नाम्ना समुद्रश्च सागरत्वमुपागत:॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
एक बार क्रोध में आकर उन्होंने समुद्र द्वारा चिन्हित सम्पूर्ण पृथ्वी को खोदवा दिया और उसी के नाम पर वह समुद्र 'सागर' कहलाया ॥135॥
 
‘Once in a fit of rage he had the entire earth marked by the ocean dug up. The ocean came to be known as ‘Sagar’ after his name.॥ 135॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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