Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.29.132: पूर्वकाल में राजा के पराक्रम से सम्पूर्ण पृथ्वी उसके अधीन हो गई थी। उसने एक हजार अश्वमेध यज्ञ करके देवताओं को संतुष्ट किया था॥132॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  12.29.132 
एकच्छत्रा मही यस्य प्रतापादभवत् पुरा।
योऽश्वमेधसहस्रेण तर्पयामास देवता:॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में राजा के पराक्रम से सम्पूर्ण पृथ्वी उसके अधीन हो गई थी। उसने एक हजार अश्वमेध यज्ञ करके देवताओं को संतुष्ट किया था॥132॥
 
‘In the past, due to the might of the king, the entire earth came under his control. He satisfied the gods by performing a thousand Ashwamedha Yajnas.॥ 132॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)