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mahabharat 12.29.131: जैसे वर्षा ऋतु के अन्त में मेघरहित आकाश में तारे चन्द्रमा के पीछे-पीछे चलते हैं, वैसे ही जब राजा सगर युद्ध आदि के लिए कहीं जाते थे, तो उनके साठ हजार पुत्र उनके पीछे-पीछे चलते थे॥131॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.131 
षष्टि: पुत्रसहस्राणि यं यान्तमनुजग्मिरे।
नक्षत्रराजं वर्षान्ते व्यभ्रे ज्योतिर्गणा इव॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु के अन्त में मेघरहित आकाश में तारे चन्द्रमा के पीछे-पीछे चलते हैं, वैसे ही जब राजा सगर युद्ध आदि के लिए कहीं जाते थे, तो उनके साठ हजार पुत्र उनके पीछे-पीछे चलते थे॥131॥
 
Just as the stars follow the Moon in the cloudless sky at the end of the rainy season (autumn), similarly when King Sagara used to travel somewhere for war etc., his sixty thousand sons used to follow him.॥ 131॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)