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श्लोक  12.29.130 
सगरं च महात्मानं मृतं शुश्रुम सृंजय।
ऐक्ष्वाकं पुरुषव्याघ्रमतिमानुषविक्रमम्॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
सृंजय! मैंने सुना है कि इक्ष्वाकु वंश के महापुरुष सगर भी मर गए। उनका पराक्रम असाधारण था।
 
‘Srunjay! I have heard that the great Sagar, the man of Ikshvaku lineage, also died. His valour was extraordinary.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)