श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  12.29.13-14h 
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्॥ १३॥
सृंजयं पुत्रशोकार्तं यथायं नारदोऽब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
इस सम्बन्ध में एक प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जाता है, जो नारद मुनि ने पुत्र-वियोग के शोक से पीड़ित राजा संजय को सुनाया था ॥13 1/2॥
 
In this regard an example of an ancient history is given, as told by the sage Narada to king Sanjaya who was suffering from the grief of losing his son. ॥13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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