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mahabharat 12.29.129: सृंजय! रन्तिदेव उपर्युक्त चारों गुणों में आपसे श्रेष्ठ थे और आपके पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो आपके पुत्र का क्या हुआ? अतः आप उनके लिए शोक न करें॥129॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.129 
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
सृंजय! रन्तिदेव उपर्युक्त चारों गुणों में आपसे श्रेष्ठ थे और आपके पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो आपके पुत्र का क्या हुआ? अतः आप उनके लिए शोक न करें॥129॥
 
'Srunjay! Rantidev was superior to you in all the four qualities mentioned above and was a much more pious soul than your son. When he too died, what about your son? Therefore, do not grieve for him.॥ 129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)