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mahabharat 12.29.122: महान् तपस्वी एवं कठोर व्रतों का पालन करने वाले यशस्वी राजा रन्तिदेव के यज्ञ में ग्राम और वन के पशु भी उपस्थित होते थे ॥122॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.122 
उपातिष्ठन्त पशव: स्वयं तं संशितव्रतम्।
ग्राम्यारण्या महात्मानं रन्तिदेवं यशस्विनम्॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
महान् तपस्वी एवं कठोर व्रतों का पालन करने वाले यशस्वी राजा रन्तिदेव के यज्ञ में ग्राम और वन के पशु भी उपस्थित होते थे ॥122॥
 
'The animals of the villages and forests used to present themselves for the sacrifices performed by the illustrious king Rantidev, who was a great saint and who observed strict vows.॥ 122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)