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mahabharat 12.29.117: राजा गय ने अश्वमेध यज्ञ में दस व्यास (पचास हाथ) चौड़ी और उससे दुगुनी लम्बी सोने की एक भूमि बनवाई थी और उसे दक्षिणा स्वरूप दान कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.117 
सौवर्णीं पृथिवीं कृत्वा दशव्यामां द्विरायताम्।
दक्षिणामददद् राजा वाजिमेधे महाक्रतौ॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
राजा गय ने अश्वमेध यज्ञ में दस व्यास (पचास हाथ) चौड़ी और उससे दुगुनी लम्बी सोने की एक भूमि बनवाई थी और उसे दक्षिणा स्वरूप दान कर दिया था।
 
‘King Gaya had built an earth ten vyamas (fifty hands) wide and twice as long made of gold and donated it as dakshina during the great sacrifice of Ashwamedha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)