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mahabharat 12.29.116: हे महापुरुष! उन्होंने देवताओं को सोमरस से, ब्राह्मणों को धन से, पितरों को श्राद्ध कर्म से और स्त्रियों को कामसुख से तृप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.116 
तर्पयामास सोमेन देवान् वित्तैर्द्विजानपि।
पितॄन् स्वधाभि: कामैश्च स्त्रिय: स पुरुषर्षभ॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! उन्होंने देवताओं को सोमरस से, ब्राह्मणों को धन से, पितरों को श्राद्ध कर्म से और स्त्रियों को कामसुख से तृप्त किया।
 
'O great man! He satisfied the gods with Soma juice, the Brahmins with wealth, the ancestors with Shraddha rituals and women with sexual pleasure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)