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mahabharat 12.29.111: सृंजय ! सुना है कि अमृतराय के पुत्र राजा गय की भी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने सौ वर्षों तक केवल यज्ञों से बचा हुआ अन्न खाया था ॥111॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.111 
गयं चामूर्तरयसं मृतं शुश्रुम सृंजय।
य: स वर्षशतं राजा हुतशिष्टाशनोऽभवत्॥ १११॥
 
 
अनुवाद
सृंजय ! सुना है कि अमृतराय के पुत्र राजा गय की भी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने सौ वर्षों तक केवल यज्ञों से बचा हुआ अन्न खाया था ॥111॥
 
'Srunjay! It is heard that King Gaya, son of Amrutaraaya, also died. He ate only the food left over from the sacrifices for a hundred years.॥ 111॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)