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स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ १०४॥
अनुवाद
सृंजय! राजा अम्बरीष चारों शुभ गुणों में आपसे श्रेष्ठ थे और आपके पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे ही जीवित नहीं रह सके, तो अन्यों की तो बात ही क्या? अतः आप अपने मृत पुत्र के लिए शोक न करें॥104॥
‘Srunjay! King Ambrish was superior to you in all the four auspicious qualities and was also much more pious than your son. When even he could not survive, what can be said about others? Therefore, do not mourn for your dead son.॥ 104॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥