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mahabharat 12.29.101: ब्राह्मणों पर स्नेह रखने वाले राजा अम्बरीष ने यज्ञ के समय अपने विशाल यज्ञ-मण्डप में ब्राह्मणों की सेवा के लिए दस लाख ऐसे राजाओं को नियुक्त किया था, जिन्होंने स्वयं दस-दस हजार यज्ञ सम्पन्न किए थे॥101॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.101 
य: सहस्रं सहस्राणां राज्ञामयुतयाजिनाम्।
ईजानो वितते यज्ञे ब्राह्मणेभ्य: सुसंहित:॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों पर स्नेह रखने वाले राजा अम्बरीष ने यज्ञ के समय अपने विशाल यज्ञ-मण्डप में ब्राह्मणों की सेवा के लिए दस लाख ऐसे राजाओं को नियुक्त किया था, जिन्होंने स्वयं दस-दस हजार यज्ञ सम्पन्न किए थे॥101॥
 
'King Ambarisha, who had affection for the Brahmins, at the time of performing a yajna, had appointed ten lakh such kings to serve the Brahmins in his huge yajna-mandap, who themselves had performed ten thousand yajnas each.॥ 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)