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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.29.1 
वैशम्पायन उवाच
अव्याहरति राजेन्द्रे धर्मपुत्रे युधिष्ठिरे।
गुडाकेशो हृषीकेशमभ्यभाषत पाण्डव:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! जब सबके समझाने पर भी महाराज युधिष्ठिर के पुत्र धर्म चुप रहे, तब पाण्डु पुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! When despite everyone's persuasion, Maharaja Yudhishthira's son Dharma remained silent, then Pandu's son Arjuna said to Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)