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mahabharat 12.289.7: ये भृगुपुत्र मुनिवर उशना सबके लिए आदरणीय हैं और दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हैं। इस कारण विशेष हो जाने से क्रोधित होकर वे देवताओं के विरुद्ध हो गए॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.289.7 
एष भार्गवदायादो मुनिर्मान्यो दृढव्रत:।
सुराणां विप्रियकरो निमित्ते कारणात्मके॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ये भृगुपुत्र मुनिवर उशना सबके लिए आदरणीय हैं और दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हैं। इस कारण विशेष हो जाने से क्रोधित होकर वे देवताओं के विरुद्ध हो गए॥7॥
 
This Bhriguputra Munivar Ushana is respectable for all and firmly follows the best fast. Angered by this becoming a special cause, they became against the gods*॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)