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mahabharat 12.289.5: पितामह! देवर्षि उष्ण अत्यंत तेजस्वी हैं; परंतु वे आकाश के मध्य से होकर क्यों नहीं जाते? मैं इन सब बातों को पूर्णतः जानना चाहता हूँ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.289.5 
न याति च स तेजस्वी मध्येन नभस: कथम्।
एतदिच्छामि विज्ञातुं निखिलेन पितामह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पितामह! देवर्षि उष्ण अत्यंत तेजस्वी हैं; परंतु वे आकाश के मध्य से होकर क्यों नहीं जाते? मैं इन सब बातों को पूर्णतः जानना चाहता हूँ॥5॥
 
Grandfather! Devarshi Ushna is very radiant; but why does he not go through the middle of the sky? I want to know all these things completely. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)