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mahabharat 12.289.37: तत्पश्चात् बुद्धिमान् ऋषि शुक्राचार्य ने वर देने वाले देव महादेवजी और उमादेवी को प्रणाम करके इच्छित गति प्राप्त की ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.289.37 
तत: प्रणम्य वरदं देवं देवीमुमां तथा।
उशना प्राप तद्धीमान् गतिमिष्टां महामुनि:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बुद्धिमान् ऋषि शुक्राचार्य ने वर देने वाले देव महादेवजी और उमादेवी को प्रणाम करके इच्छित गति प्राप्त की ॥37॥
 
Thereafter, the intelligent sage Shukracharya attained the desired speed by paying obeisance to the boon-giving deity Mahadevji and Umadevi. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)