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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.289.35 
देव्युवाच
हिंसनीयस्त्वया नैव मम पुत्रत्वमागत:।
न हि देवोदरात् कश्चिन्नि:सृतो नाशमृच्छति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
देवी पार्वती बोलीं - हे प्रभु! अब यह शुक्र मेरा पुत्र हो गया है; अतः आप इसका नाश न करें। हे प्रभु! आपके गर्भ से उत्पन्न कोई भी पुरुष नष्ट नहीं हो सकता।
 
Goddess Parvati said—O Lord! Now this Shukra has become my son; hence you should not destroy him. O Lord! No man who has come out of your womb can be destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)