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mahabharat 12.289.34: उस समय देवी पार्वती ने क्रोधित होकर अपने पति भगवान पशुपति को रोक लिया। देवी द्वारा भगवान शंकर को रोके जाने पर शुक्राचार्य को पुत्र का पद प्राप्त हुआ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.289.34 
अवारयत तं देवी क्रुद्धं पशुपतिं पतिम्।
पुत्रत्वमगमद् देव्या वारिते शंकरे च स:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवी पार्वती ने क्रोधित होकर अपने पति भगवान पशुपति को रोक लिया। देवी द्वारा भगवान शंकर को रोके जाने पर शुक्राचार्य को पुत्र का पद प्राप्त हुआ॥34॥
 
At that time Goddess Parvati got angry and stopped her husband Lord Pashupati. When Lord Shankar was stopped by the goddess, Shukracharya attained his son's state. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)