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mahabharat 12.289.25: तदनन्तर महादेवजी ने, जो अत्यन्त बुद्धिमान, अचिंत्य और सदा सत्य परायण रहने वाले थे, अपनी तपस्या के कारण उशना के तप में वृद्धि देखी ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.289.25 
तत्संयोगेन वृद्धिं चाप्यपश्यत् स तु शंकर:।
महामतिरचिन्त्यात्मा सत्यधर्मरत: सदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महादेवजी ने, जो अत्यन्त बुद्धिमान, अचिंत्य और सदा सत्य परायण रहने वाले थे, अपनी तपस्या के कारण उशना के तप में वृद्धि देखी ॥25॥
 
After that, Mahadevji, who was extremely intelligent, unthinkable and always devoted to the truth, saw an increase in the penance of Ushna due to his penance. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)