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mahabharat 12.289.21: युधिष्ठिर ने पूछा - राजन्! महान् तेजस्वी उशना बुद्धिमान देवाधिदेव महादेवजी के उदर में क्यों विचरण करती थी और वहाँ क्या करती थी? 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.289.21 
युधिष्ठिर उवाच
किमर्थं व्यचरद् राजन्नुशना तस्य धीमत:।
जठरे देवदेवस्य किं चाकार्षीन्महाद्युति:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - राजन्! महान् तेजस्वी उशना बुद्धिमान देवाधिदेव महादेवजी के उदर में क्यों विचरण करती थी और वहाँ क्या करती थी? 21॥
 
Yudhishthir asked – King! Why did the great and brilliant Ushan roam in the stomach of the wise Devadhidev Mahadevji and what did he do there? 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)