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mahabharat 12.289.2: परम बुद्धिमान् और कविदेव उशना सदैव दैत्यों को प्रिय और देवताओं को अप्रिय करने वाले कार्यों में क्यों लगे रहते हैं? 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.289.2 
कथं देवर्षिरुशना सदा काव्यो महामति:।
असुराणां प्रियकर: सुराणामप्रिये रत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान् और कविदेव उशना सदैव दैत्यों को प्रिय और देवताओं को अप्रिय करने वाले कार्यों में क्यों लगे रहते हैं? 2॥
 
Why does Ushna, the most intelligent and poetic deity, always remain engaged in doing what is pleasing to the demons and displeasing to the gods? 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)