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mahabharat 12.289.19: जैसे ही वह मुड़ा, भृगुपुत्र उशना उसके हाथों में आ गई। उशना को उसके हाथों में देखकर, देवों के स्वामी भगवान शिव ने अपना मुख खोला और अपने हाथ के एक हल्के से धक्के से उशना को उसके मुख में डाल दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.289.19 
पाणिमध्यगतं दृष्ट्वा भार्गवं तमुमापति:।
आस्यं विवृत्य ककुदी पाणिना प्राक्षिपच्छनै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही वह मुड़ा, भृगुपुत्र उशना उसके हाथों में आ गई। उशना को उसके हाथों में देखकर, देवों के स्वामी भगवान शिव ने अपना मुख खोला और अपने हाथ के एक हल्के से धक्के से उशना को उसके मुख में डाल दिया।
 
As soon as he turned, Bhrigu's son Ushna came into his hands. Seeing Ushna in his hands, Lord Shiva, the lord of all gods, opened his mouth and with a gentle push of his hand put Ushna inside his mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)