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mahabharat 12.289.17: तपस्वी शुक्राचार्य को उस रूप में पहचानकर भगवान शिव ने उन्हें भाले पर बैठा हुआ समझा और धनुष को पकड़े हुए अपने हाथ से भाले को मोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.289.17 
विज्ञातरूप: स तदा तप:सिद्धोऽथ धन्विना।
ज्ञात्वा शूलं च देवेश: पाणिना समनामयत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी शुक्राचार्य को उस रूप में पहचानकर भगवान शिव ने उन्हें भाले पर बैठा हुआ समझा और धनुष को पकड़े हुए अपने हाथ से भाले को मोड़ दिया।
 
Recognizing the ascetic Shukracharya in that form, Lord Shiva considered him to be sitting on a spear and bent the spear with his hand holding the bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)