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mahabharat 12.289.13: यह सुनकर महायोगी महेश्वर क्रोधित हो गए और उनकी आंखें लाल हो गईं तथा वे हाथ में त्रिशूल लेकर खड़े हो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.289.13 
एतच्छ्रुत्वा तत: क्रुद्धो महायोगी महेश्वर:।
संरक्तनयनो राजन् शूलमादाय तस्थिवान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर महायोगी महेश्वर क्रोधित हो गए और उनकी आंखें लाल हो गईं तथा वे हाथ में त्रिशूल लेकर खड़े हो गए।
 
On hearing this, the great yogi Maheshwar became furious and with his eyes turning red, he stood up holding a trident in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)