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mahabharat 12.289.10: धन चोरी हो जाने पर कुबेर को शांति नहीं मिली। क्रोधित और व्यथित होकर वे देवेश्वर महादेवजी के पास गए।   |   mahabharat अध्याय 12.289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.289.10 
हृते धने तत: शर्म न लेभे धनदस्तथा।
आपन्नमन्यु: संविग्न: सोऽभ्यगात् सुरसत्तमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धन चोरी हो जाने पर कुबेर को शांति नहीं मिली। क्रोधित और व्यथित होकर वे देवेश्वर महादेवजी के पास गए।
 
Kubera could not find peace after his wealth was stolen. Angry and distressed, he went to Deveshwar Mahadevji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)