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युधिष्ठिर उवाच
तिष्ठते मे सदा तात कौतूहलमिदं हृदि।
तदहं श्रोतुमिच्छामि त्वत्त: कुरुपितामह॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे कुरुवंश के पितामह, यह एक जिज्ञासापूर्ण प्रश्न है जो मुझे बहुत समय से परेशान कर रहा है और मैं इसका उत्तर आपसे सुनना चाहता हूँ।
Yudhishthira asked - O dear father of the Kuru clan, this is a curious question that has been troubling me for a long time and I want to hear its answer from you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥