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mahabharat 12.288.47: अरिष्टनेमि का उपर्युक्त उपदेश सुनकर राजा सगर मोक्षदायक गुणों से युक्त हो गए और अपनी प्रजा का पालन करने लगे ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.288.47 
तत् तस्य वचनं श्रुत्वा सम्यक् स पृथिवीपति:।
मोक्षजैश्च गुणैर्युक्त: पालयामास च प्रजा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अरिष्टनेमि का उपर्युक्त उपदेश सुनकर राजा सगर मोक्षदायक गुणों से युक्त हो गए और अपनी प्रजा का पालन करने लगे ॥47॥
 
King Sagar, after listening to the above mentioned advice of Arishtanemi, became full of qualities conducive to salvation and started following his people. 47॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि सगरारिष्टनेमिसंवादेऽष्टाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्याय: ॥ २८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें सगर और अरिष्टनेमिका संवादविषयक दो सौ अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)