Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.288.44: इतना ही नहीं, इस संसार में अपनी ही संतान के गुणों के अभाव का दुःख भोगना पड़ता है। विपरीत गुणों वाले व्यक्तियों से भी सम्बन्ध बनता है। इस प्रकार जो यहाँ अधिकतर दुःख ही देखता है, ऐसा कौन मनुष्य मोक्ष का आदर नहीं करेगा?'॥44॥ | mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपत्यानां च वैगुण्यं जनं विगुणमेव च।
पश्यन् भूयिष्ठशो लोके को मोक्षं नाभिपूजयेत् ॥ ४४॥
अनुवाद
इतना ही नहीं, इस संसार में अपनी ही संतान के गुणों के अभाव का दुःख भोगना पड़ता है। विपरीत गुणों वाले व्यक्तियों से भी सम्बन्ध बनता है। इस प्रकार जो यहाँ अधिकतर दुःख ही देखता है, ऐसा कौन मनुष्य मोक्ष का आदर नहीं करेगा?'॥44॥
‘Not only this, in this world one has to face the pain of the lack of qualities of one's own children. One also comes into relations with people having opposite qualities. In this way, who sees mostly suffering here, which such person will not respect salvation?'॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥