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mahabharat 12.288.41: बहुत से ऋषि, देवता और राक्षस इस लोक से परलोक को चले गए हैं। जो इसे सदैव देखता और स्मरण करता है, वह मुक्त हो जाता है।॥41॥   |   mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.288.41 
गतानृषींस्तथा देवानसुरांश्च तथा गतान्।
लोकादस्मात् परं लोकं य: पश्यति स मुच्यते॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
बहुत से ऋषि, देवता और राक्षस इस लोक से परलोक को चले गए हैं। जो इसे सदैव देखता और स्मरण करता है, वह मुक्त हो जाता है।॥41॥
 
‘Many sages, gods and demons have gone from this world to the other world. One who always sees and remembers this is liberated.’॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)