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mahabharat 12.288.40: ‘समय आने पर पुरुषार्थ नष्ट हो जाता है, आँखें अंधी हो जाती हैं, कान बहरे हो जाते हैं और प्राणशक्ति अत्यंत क्षीण हो जाती है। जो इन सब बातों को सदैव देखता और सोचता रहता है, वह संसार के बंधन से मुक्त हो जाता है।’॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.288.40 
पुंस्त्वोपघातं कालेन दर्शनोपरमं तथा।
बाधिर्यं प्राणमन्दत्वं य: पश्यति स मुच्यते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘समय आने पर पुरुषार्थ नष्ट हो जाता है, आँखें अंधी हो जाती हैं, कान बहरे हो जाते हैं और प्राणशक्ति अत्यंत क्षीण हो जाती है। जो इन सब बातों को सदैव देखता और सोचता रहता है, वह संसार के बंधन से मुक्त हो जाता है।’॥40॥
 
‘When the time comes, manliness is lost, eyes become blind, ears become deaf and life force becomes extremely weak. He who always sees and thinks about all these things, becomes free from the bondage of the world.'॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)