Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.288.35: जिसके लिए भांग, कुशा, रेशम, छाल, ऊनी वस्त्र और मृगचर्म के वस्त्र - ये सब एक समान हैं - वह भी मुक्त है।'   |   mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.288.35 
क्षौमं च कुशचीरं च कौशेयं वल्कलानि च।
आविकं चर्म च समं यस्य स्यान्मुक्त एव स:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिसके लिए भांग, कुशा, रेशम, छाल, ऊनी वस्त्र और मृगचर्म के वस्त्र - ये सब एक समान हैं - वह भी मुक्त है।'
 
'He for whom clothes made of hemp, rags of kusha, silk, bark, woolen clothes and deerskin - all are the same - he too is free.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)