Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.288.32: जो इसे देखता है, वह संतुष्ट और मुक्त है; परन्तु जो इसे नहीं देखता, वह मारा जाता है - जन्म-मरण के चक्र में फंसा रहता है। जो थोड़े से लाभ से संतुष्ट है, वह इस संसार में मुक्त है।॥32॥ | mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: पश्यति स संतुष्टो न पश्यंश्च विहन्यते।
यश्चाप्यल्पेन संतुष्टो लोकेऽस्मिन् मुक्त एव स:॥ ३२॥
अनुवाद
जो इसे देखता है, वह संतुष्ट और मुक्त है; परन्तु जो इसे नहीं देखता, वह मारा जाता है - जन्म-मरण के चक्र में फंसा रहता है। जो थोड़े से लाभ से संतुष्ट है, वह इस संसार में मुक्त है।॥32॥
‘He who sees this is satisfied and free; but he who does not see this is killed – remains trapped in the cycle of birth and death. He who is satisfied with little gain is free in this world.'॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥