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सगर उवाच
किं श्रेय: परमं ब्रह्मन् कृत्वेह सुखमश्नुते।
कथं न शोचेन्न क्षुभ्येदेतदिच्छामि वेदितुम्॥ ३॥
अनुवाद
सगर ने पूछा - हे ब्रह्म! इस संसार में कौन-सा परम शुभ कर्म करने से मनुष्य सुख प्राप्त कर सकता है? और किस उपाय से उसे दुःख या संताप नहीं होता? मैं यह जानना चाहता हूँ।
Sagara asked - Brahman! By performing which ultimate auspicious deed in this world can a man attain happiness? And by which means can he not experience grief or anguish? I want to know this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥