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mahabharat 12.288.20: "जब मृत्यु तुम्हारे सामने ही तुम्हारे सगे-संबंधियों को मार डाले और तुम महान प्रयत्न करने पर भी उन्हें बचा न सको, तब तुम्हें स्वयं विचार करना चाहिए कि मुझमें क्या शक्ति है?"॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.288.20 
स्वजनं हि यदा मृत्युर्हन्त्येव तव पश्यत:।
कृतेऽपि यत्ने महति तत्र बोद्धव्यमात्मना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"जब मृत्यु तुम्हारे सामने ही तुम्हारे सगे-संबंधियों को मार डाले और तुम महान प्रयत्न करने पर भी उन्हें बचा न सको, तब तुम्हें स्वयं विचार करना चाहिए कि मुझमें क्या शक्ति है?"॥20॥
 
"When death kills your relatives right in front of your eyes and you are unable to save them despite making great efforts, then you should think for yourself what power do I have?"॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)