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mahabharat 12.287.57: क्योंकि राजा का चरित्र और स्वभाव उसकी प्रजा के समान ही होता है। जब उसके कल्याण का अवसर आता है, तो वह शीघ्र ही अपनी समस्त प्रजा को कल्याण का भागी बना लेता है ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  12.287.57 
यथाशीला हि राजान: सर्वान् विषयवासिन:।
श्रेयसा योजयत्याशु श्रेयसि प्रत्युपस्थिते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि राजा का चरित्र और स्वभाव उसकी प्रजा के समान ही होता है। जब उसके कल्याण का अवसर आता है, तो वह शीघ्र ही अपनी समस्त प्रजा को कल्याण का भागी बना लेता है ॥57॥
 
Because the character and nature of the king are the same as that of his subjects. When an opportunity for his welfare presents itself, he soon makes all his subjects a part of the welfare. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)