श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.287.56 
यत्र राजा धर्मनित्यो राज्यं धर्मेण पालयेत्।
अपास्य कामान् कामेशो वसेत् तत्राविचारयन्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जिस स्थान पर राजा धर्मपूर्वक रहकर धर्मानुसार राज्य का संचालन करता है तथा सम्पूर्ण कामनाओं का स्वामी होकर भी विषय-भोगों से विमुख रहता है, वहाँ बिना कुछ सोचे-समझे निवास करना चाहिए ॥ 56॥
 
A place where the king remains righteous and rules the kingdom according to the dharma and despite being the master of all desires, remains averse to sensual pleasures, one should reside there without thinking about anything. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)