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mahabharat 12.287.54: जहाँ दुराचारी मनुष्यों को दण्ड दिया जाता है और वीर पुरुषों को सम्मान दिया जाता है, वहाँ मनुष्य को गुणवान और श्रेष्ठ पुरुषों के बीच विचरण करना चाहिए और निवास करना चाहिए ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.287.54 
दण्डो यत्राविनीतेषु सत्कारश्च कृतात्मसु।
चरेत् तत्र वसेच्चैव पुण्यशीलेषु साधुषु॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
जहाँ दुराचारी मनुष्यों को दण्ड दिया जाता है और वीर पुरुषों को सम्मान दिया जाता है, वहाँ मनुष्य को गुणवान और श्रेष्ठ पुरुषों के बीच विचरण करना चाहिए और निवास करना चाहिए ॥ 54॥
 
Where unruly men are punished and brave men are honoured, there one should wander and reside among the virtuous and noble men. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)