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mahabharat 12.287.53: जहाँ लोग बिना माँगे भी प्रसन्नतापूर्वक दान देते हैं, वहाँ मन को वश में करने वाला पुरुष पुण्यात्मा पुरुष के समान स्वस्थ मन से निवास करे ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.287.53 
प्रीयमाणा नरा यत्र प्रयच्छेयुरयाचिता:।
स्वस्थचित्तो वसेत् तत्र कृतकृत्य इवात्मवान्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जहाँ लोग बिना माँगे भी प्रसन्नतापूर्वक दान देते हैं, वहाँ मन को वश में करने वाला पुरुष पुण्यात्मा पुरुष के समान स्वस्थ मन से निवास करे ॥53॥
 
Where people happily give alms without even asking, may a man who controls the mind reside in a healthy state of mind like a virtuous person. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)