श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.287.5 
यै: कश्चित् सम्मतो लोके गुणैश्च पुरुषो मुने।
भवत्यनपगान् सर्वांस्तान् गुणान् लक्षयामहे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मुनि! मैं आपमें उन गुणों का कभी अभाव नहीं देखता, जिनके कारण इस संसार में मनुष्य का सम्मान होता है॥5॥
 
'Muni! I never see any lack of those qualities in you which make any man respected in this world. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)