vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
»
श्लोक 5
श्लोक
12.287.5
यै: कश्चित् सम्मतो लोके गुणैश्च पुरुषो मुने।
भवत्यनपगान् सर्वांस्तान् गुणान् लक्षयामहे॥ ५॥
अनुवाद
मुनि! मैं आपमें उन गुणों का कभी अभाव नहीं देखता, जिनके कारण इस संसार में मनुष्य का सम्मान होता है॥5॥
'Muni! I never see any lack of those qualities in you which make any man respected in this world. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×